रचना प्रक्रिया



रचना प्रक्रिया 


आस्ट्रिया के विख्यात कवि –आलोचक Ernst Fisher ने The Necessity of Art में एक दिलचस्प बात कही है,-उनके अनुसार कला अपने मूल रूप में जादू है और वह इसलिए जरूरी है कि दुनिया को समझने और बदलने के साथ–साथ उसमें सम्मोहन अंतर्निहित होता है. मुझे लगता है कि कला में यह जादू होना चाहिए; उसकी पहली पंक्ति, उसका अज़ान या रेखाओं के रंग आपको विमोहित नहीं करते तो वह कुछ और है.

कला का घर साझा होता है.यहाँ एकल परिवार नहीं होते-इस कुटुंब में ताक-झांक और आवा-जाही रहती है.कुछ पहले ही यह आभास हो गया  कि मैं इसी घर का सदस्य हूँ. किसी लय के पीछे बावला हो सकता हूँ किसी पंक्ति के लिए महीनों खराब कर सकता हूँ,कहना ना होगा कि  इस नागरिकता की यह न्यूनतम शर्त है.  जब बहुत विवश होता हूँ लिखता हूँ. यह अकारण नही है कि रचना प्रकिया में हिम-युग आते हैं. कलाएं अंदर-बाहर की टकराहट से पैदा होती हैं. और उनकी सार्थकता यही है कि वह अंदर–बाहर दोनों को बदलती हैं.            

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